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Sat, 6 Jun,
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महोदय, जी
पहलूओं को छूआ है जो हमें अभी तक मालूम न थे। ये मेरा विश्वास और उम्मीद है कि भविष्य में और
भी कोरोना से संबंधित जानकारी अपने श्रोताओं से साझा करते रहेंगे।
महोदय जी, मेरे दिमाग में रह रहकर यह सवाल आता है कि जब एलोपैथी में कोरोना की दवा नहीं है तब
भी क्यों केवल इसी पैथी की और सबका झुकाव है? क्यों आयुर्वेद या अन्य पद्धितियों पर भरोसा नहीं जताया
सरकार ने? डा. वेद चतुर्वेदी, स्वास्थ विशेषज्ञ एवं आकाशवाणी सवांददाता श्री सिद्दार्थ सिंह जी कृपया
अगले कार्यक्रम में यह विषय, जरुर छुने का प्रयास करें।
भी क्यों केवल इसी पैथी की और सबका झुकाव है? क्यों आयुर्वेद या अन्य पद्धितियों पर भरोसा नहीं जताया
सरकार ने? डा. वेद चतुर्वेदी, स्वास्थ विशेषज्ञ एवं आकाशवाणी सवांददाता श्री सिद्दार्थ सिंह जी कृपया
अगले कार्यक्रम में यह विषय, जरुर छुने का प्रयास करें।
श्रीमान जी, यदि आप चाहें तो मुमकिन है कि सारा जहां सुन ले इसे, स्वरचित कविता है...
कोरोना मेेरी मान..
क्या सोचा था तुम बहुत खुश होगे यहां आकर
हां हम मेहमान ही नहीं अतिथि का भी स्वागत करते हैं
बिगड़ें अगर वो किसी वजह से तो हाथ जोड़ मनाते है
घर आये कि इज्जत खातिर तो हम पैरों भी पड़ जाते हैं
तुमने सोचा होगा ये बेवकूफ हैं, इनसे ही पेच्चे लड़ाते हैं
हमने ढ़ील देकर ऊपर बैठा लिया, अब सद्दी तक ले जाते हैं
कटेंगे कन्ने से कनकव्वे, पंख जो तेरे फड़फड़ाते हैं
तुम ने सोचा होगा यहाँ भाई-भाई आपस में लड़ रहे हैं
यहां मेरा सही काम बन जायेगा
खुद ही आपस में लड़ रहे हो तो मुझसे कौन लड़ेगा
इतिहास एक बार पढ़ लेता बावले
कि जब भी बाहरी विपदा आई है
हम एक साथ खड़े हो जाते हैं
अब तुम्हारी यात्रा का अन्तिम पड़ाव है।
यहां तो डाक्टर ही जुगाड़ ऐसा बेठा देते हैं
कि बिमारी हो कैसी भी जड़ से खा जाते हैं
कोरोना, मेरी मान, अभी भी निकल ले पतली गली से..
जब यह इमेल आप शामिल करें तो, आप द्वारा पठित कविता सुनकर आंनद ले पाऊं।
भवदीय, राजेश कुमार पूनिया, नई दिल्ली

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