Tuesday, December 16, 2025

 मंज़िल के क़रीब आ गई है किस्तियाँ अपनी 

वो आँखों से दूर जाने को बेताब हैं तभी

कान भी सुना अनसुना करने लगे सभी 


मंज़िल के क़रीब आ गई है किस्तियाँ अपनी 


साहिल भी मिल मिल के छूट गए सभी 

पुख्ता सा किनारा मिल ना सका कभी 


हम दिलों के जादूगर भले ना सही ऐ सूरज 

दिलों का रफ़ू , मुक्कमल मर्ज़ख़ाना ए हज 


मंज़िल के क़रीब आ गई है किस्तियाँ अपनी 


है चिंगारी जो सुलगती रही ताउम्र, उसे थोड़ी सी हवा दे 

ना कहोगे ए दोस्त फिर कभी की अब ये ,अब वो ,दवा दे 

एचबीडी प्यारे दुलारे अरुण बुड़ाकोटी 😁🙏🥂

 दिलों पे राज किया, नाम दिलराज भी हैं 

छुपा राज यारों के , सबके हमराज़ भी हैं 


कहें लाला प्यार से , हैं पवित्र व पावन 

शिव भक्त जमाने से बनते  हैं ये रावण 


हैं दुआ मेरे यार का दिल जवां जवां रहे 

मिट जायें ग़म , तम्मना इस बाग में रहे 

एचबीडी देशराज भाई 🍻🥂🙏

 रहते आए हैं आप सदा से दिल्ली में 

आग लगा दे है वो ताक़त तिल्ली में 


पीछे रह,मजा ले औरो की खिल्ली में 

साहब से डर है , लगे बात दिल ही में 


सतरंज गुर मिले , बैठ घास गिल्ली में 

नजर चौकन्नी, जैसे है होती बिल्ली में 


वक्त पे काम आ जाए, 

बात जो अपनी छुपाये 

बात पुरानी याद दिलाए 

देख कर मंद मंद मुस्काए 

hb२u🙋‍♂️🙏❤️

 🎂 🎂 

आपकी है सदा अमृतवर्षा वाणी में 


दिल के हैं साफ़ , कर देते हैं माफ़ 

भोजन करें हाफ़, जीवन में है लाफ़ 


भजनों के रसिक, मनोज भैया के पथिक 

नहीं है दुखों की तपिश, रहते हमेशा हर्षित 


एज़ाज़ भाई जान और भाई ललित  हैं यार

कभी ये दोस्त कुल मिलाकर होते थे चार 


अजय तो भगवान को प्यारा हो गया 

सबसे वो दोस्त अपना न्यारा हो गया 


आओ आपके घर एक महफ़िल सजायें हम 

एक दूजे से बातें करें, रूठों को मनायें हम 

मनमुटाव से ख़राब खेल सारा हो जाए है 

दिल से दिल तक सफ़र खारा हो जाए है 


रखो भाई साहब अपनों से वास्ता इतना 

जरूरी होता है सुबह का नास्ता जितना 

एचबीडी प्यारे विन्नु 🎂🎂

Wednesday, September 3, 2025

फिर मुई रोटी जली

 

लहर


बरसों बरसकर प्यार किया

गुलाबी मालती के गुंचो

 

थे सो अरमान दिल में

बसाते हसरतों की दुनिया

बदली दुनिया कैसी लहर चली


कैसी दौबारा कोरोना की लहर चली 

गाँव या शहर, चौड़ी या तंग गली 

 

 

मस्त दिल में एक तंग सी गली

शायद अबके कमी मेरी उसे खली 

 

फिर मुई रोटी जली

फिर मुई रोटी जली

किसे मेरी याद आई

जन्मदाता जा चुके दूर बहुत

फिर किसे मेरी याद आई

मेरा अनुज कोई नहीं,

अनुज हूँ तुमने समझा नहीं

फिर किसे मेरी याद आई  

फिर मुई रोटी जली

 

रही कलाई सूनी सूनी   

डोर बहना प्रीत की टूटी


फिर किसेमेरी याद आई  

फिर मुई रोटी जली

Thursday, May 8, 2025

 


मेरा भारत महान है 

हम सभी दुश्मन के लिये,  वक्त आने पे फौलाद होंगे

जो पीठ दिखा दे, वो किसी कायर ही की औलाद होंगे

                                                                द्वाराः राजेश कुमार पूनिया


है रगो में बहता खून, जब तलक मेरी (जवान)

नहीं होगा तब तक, नींद में खलल तेरी

                                                                द्वाराः राजेश कुमार पूनिया


ये मत समझना वीरो,   के घर पे हम सोते हैं (देशवासी)

आँखों में बस, दुश्मन की, तुम्हारे हाथों मौतें हैं।।

                                                                द्वाराः राजेश कुमार पूनिया


भारत ने, भरत का सा दिखा के त्याग, तुम्हें मौके, कई हजार दिये

बदगुमानी तुम्हारी, दुनिया देख रही, हमने नंगे, सरे- ब़जार किये

                                                                द्वाराः राजेश कुमार पूनिया