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आपकी है सदा अमृतवर्षा वाणी में
दिल के हैं साफ़ , कर देते हैं माफ़
भोजन करें हाफ़, जीवन में है लाफ़
भजनों के रसिक, मनोज भैया के पथिक
नहीं है दुखों की तपिश, रहते हमेशा हर्षित
एज़ाज़ भाई जान और भाई ललित हैं यार
कभी ये दोस्त कुल मिलाकर होते थे चार
अजय तो भगवान को प्यारा हो गया
सबसे वो दोस्त अपना न्यारा हो गया
आओ आपके घर एक महफ़िल सजायें हम
एक दूजे से बातें करें, रूठों को मनायें हम
मनमुटाव से ख़राब खेल सारा हो जाए है
दिल से दिल तक सफ़र खारा हो जाए है
रखो भाई साहब अपनों से वास्ता इतना
जरूरी होता है सुबह का नास्ता जितना
एचबीडी प्यारे विन्नु 🎂🎂
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