-राजेश कुमार पूनिया-
लोकडाउ्न के दौरान
बहुत सही समय पर लिया निर्णय लॉकडाउन का
महीने भर और सही, देश में कमी है क्या काउन का
बस रोज यही दुआ करता हूँ
ना सही पंछी की तरह ऊड़ू पर बाहर चल तो सकूं
काश़, सारी धरती को घर अपना समझे होते
आज न यूँ सभी अपने-अपने घरोदों में रोते
ये चीनी हवा है, और रहेगी कुछ रोज़
यही समय है, बैठ घर अंतर में खो़ज़
हे हरिहर, तेरी दुनिया के वासी हार गये
अनगिनत गरीब सुदामा भुख की फांसी डार गये
चिकित्सक एवं परिचारिका का जीवन भी तो
उतना ही अनमोल है।
फिर क्यों घर खाली कराये, अश्लीलता से पेश आये,
ये कैसा मखोल है?
जान जोखिम में डाल, कर रहे कोशिशें, ईलाज जारी है।
पता है बावजूद इसके की छूत की ला-ईलाज बीमारी है।
मोहल्लों, सड़कों पर पहरा देती पुलिस ही अपनी हीरो है
गाये गीत, रहो घरों में ना बाहर आ, तू अच्छो बीरो है
लाते सब्जी, दूध, इत्यादि. ये भाई असल खिवैया है
नमन करें सदा हम, चल रहा इनसे जीवन पहिया है
किस्मत अच्छी या बुरी यह अपना मत होता है
कर्मशील के आगे सबका मस्तक नत् होता है
कहां दवा ढूंढ़ते हो, कुछ दिन घर बैठो,
इस ला-ईलाज का ये ही ईलाज है
-हम होगें कामयाब -
जय हिन्द