Wednesday, September 3, 2025

फिर मुई रोटी जली

 

लहर


बरसों बरसकर प्यार किया

गुलाबी मालती के गुंचो

 

थे सो अरमान दिल में

बसाते हसरतों की दुनिया

बदली दुनिया कैसी लहर चली


कैसी दौबारा कोरोना की लहर चली 

गाँव या शहर, चौड़ी या तंग गली 

 

 

मस्त दिल में एक तंग सी गली

शायद अबके कमी मेरी उसे खली 

 

फिर मुई रोटी जली

फिर मुई रोटी जली

किसे मेरी याद आई

जन्मदाता जा चुके दूर बहुत

फिर किसे मेरी याद आई

मेरा अनुज कोई नहीं,

अनुज हूँ तुमने समझा नहीं

फिर किसे मेरी याद आई  

फिर मुई रोटी जली

 

रही कलाई सूनी सूनी   

डोर बहना प्रीत की टूटी


फिर किसेमेरी याद आई  

फिर मुई रोटी जली

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