लहर
बरसों बरसकर प्यार किया
गुलाबी मालती के गुंचो
थे सो अरमान दिल में
बसाते हसरतों की दुनिया
बदली दुनिया कैसी लहर चली
कैसी दौबारा कोरोना की लहर चली
गाँव या शहर, चौड़ी या तंग गली
मस्त दिल में एक तंग सी गली
शायद अबके कमी मेरी उसे खली
फिर मुई रोटी जली
फिर मुई रोटी जली
किसे मेरी याद आई
जन्मदाता जा चुके दूर बहुत
फिर किसे मेरी याद आई
मेरा अनुज कोई नहीं,
अनुज हूँ तुमने समझा नहीं
फिर किसे मेरी याद आई
फिर मुई रोटी जली
रही कलाई सूनी सूनी
डोर बहना प्रीत की टूटी
फिर किसेमेरी याद आई
फिर मुई रोटी जली
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