रोता रहता था कि ये जिंदगी भी कोई जिंदगी है। 6 बजे वाली रेल पकड़ने के लिये वह रोजाना चाहे गर्मी हो या सर्दी हो 4.30 बजे उठ खड़ा होता था। गाय भैसों को सानी व न्यार करने के बाद थोड़ी देर वर्जिस और फिर नहाना साथ ही अपने कपड़े धोना ये ऐसा नियम बंध चूका था कि चाहे कुछ भी हो जाये ये अटल सा ही था। कई बार लगता था कि इतनी सुबह का निकला हुआ रात को 10. सवा 10 तक घर पहुचता है तो घर को केवल छूने ही जाता है क्या? 11 बजे तक खाना फिर आधे घंटा मां बाप के साथ बैठना और पत्नी से दो घड़ी बातें करना बच्चे तो पहले ही सो जाते, और 12 बजे तक ऐसी आखें लग जाती कि एक बार भी करवट नहीं लेता, क्योंकी दिन भर की इतनी ज्यादा थकान को चारपाई ही चाहिये, बस।
अच्छी बात ये थी कि वह शनी एैतवार घर से न निकलता था, दो सरकारी छुट्टियां जो होती थी उसकी। आजकल उसे घर में भी चैन न मिलने पाता था। वह अपने लड़के के लिये लड़की देखने जाता और शाम को ही घर लौटता। लड़के लड़की के गुणों को मिलाने से भी अधिक उसे बहुत खुबसूरत, विश्व सुंदरी सी लड़की की तलाश रहती। विश्वास था कि उसके लड़के के लिए कोई ऐसी लड़की जरुर मिलेगी। पिछले एक साल में वह 20-25 से भी ज्यादा लड़कियों को नापसंद कर चुका है।
आजकल, उसे अपने उन्ही रिश्तेदारों के यहां फोन पर याद दिलाने की हुड़क उठी रहती है जो पहले भी कई बार रिश्ते ला चुके हैं। छुट्टी की शाम तो इनके एक हाथ में घरेलू फोन और दूसरे हाथ में चाय तो कभी कड़वी दवा रहती है। छुट्टी के दिन कोई ही बचता होगा जो इनकी फन्टियों में न आये। क्योंकी यदि सामने से ये भी कहलवा दिया जाये कि कह दो, नहाने गयें है अभी अभी, तो ये 10-15 मिनट बाद दौबारा फोन लगा बैठते हैं और छुटते ही पूछते हैं कि ये कौन सा टाईम है नहाने का। सामने वाला भोचंक रह जाता है। किसी को कहेंगे कि अच्छा जब सैर से लौट आये तो बता देना, की कोई जरुरी बात करनी थी, उनसे। इतने दिनों से सभी के लिये मुसीबत का सामान बने हुए हैं।
एक छुट्टी की शाम को जब दो-तीन पैग अंदर गये तो जनाब ने लगाया फोन अजमानी जी को। वे पहले ही से सावधान थे, उधर से उन्होंने तो फोन नहीं उठाया लेकिन अपनी धर्मपत्नी को ये कह दिया कि कह दो कहीं बाहर गये हैं किसी काम से। आयेंगे तो बता देंगे। भाभी जी क्यों झूठ बोल रही हो आपके मुहं पे बिलकुल नहीं फबता।
आपकी आवाज से लग रहा है कि आप हमें बना रहीं हैं, सही में लगता है दूसरे कमरे में सो रहें हैं।आप उन्हे जगाना नहीं चाहतीं। आप उन्हें दही के साथ जो परांठे खिलाती हैं ना ये उन्ही का असर है, कई बार बता चुके हैं मुझे, एक दिन हमें भी तो खिलाओ भाभी जी, देखे हमें कैसे नींद आने पाती है, चलो मैं बाद में फोन करुंगा।
जैसे सूरज चढ़ता है वैसे इन्हे चढ़ने लगी, और बड़बड़ाने लगे अपने आप से ही, सारे मशरुफ हैं किसी न किसी वजह से, एक मैं ही हूँ चाहे कभी जरुरत नहीं भी है मुझे, फिर भी मैं ही फोन करता हूँ।
इच्छाओं से मुक्ति मिलती नहीं, करके देखा सो बार।
वहम दिल का ये बना, ईश्वर करो ये दूर बुखार।
राजेश कुमार पूनिया
कैसे वह उस रात सो पाया, बड़बड़ा कर अगले दिन उसकी पत्नी उसे बता रही थी। क्या मैनें कुछ ज्यादा पी ली थी? क्या मैं किसी को गाली भी दे रहा था? नहीं गाली तो नहीं पर देने में कसर ही क्या रह गई थी। क्यों अपने दिल को दुखाने के लिए उन लोगों से फोन लगाते हो जो तुमसे अब बात करना नहीं चाहते, शायद तुमने उनके द्वारा बताये कई रिश्ते ठुकरा दिये थे इस लिए वे अब तुमसे बात करना मुनासिब नहीं समझते होंगे।
आप बहुत मिलनसार और बड़े दिल वाले हैं इसलिये सबसे अपने दिल की बात करते हैं किसी से कुछ भी नहीं छुपाते। जब आपसे वे बात न करने के इस तरह बहाने बनाते हैं तब मुझे उन पर क्रोध आता है और आप पर दया। एक आदमी जब किसी को याद करके फोन मिलाये कि वह हमारा मित्र है या रिश्तेदार और दुसरी तरफ से कोई आप से बात ही न करना चाहे तो, कितना बुरा लगता है ये उन्हे क्या मालूम।
भगवान ने इसलिये ही तो ये वायरस नहीं छोड़ा है दुनिया में, कि कोई किसी से सीधे मुंह बात तो करना नहीं चाहता इसलिये मुंह पर पट्टा ही डलवा दिया सबके।

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