Tuesday, June 2, 2020

जब गरमी सताये- शेर शायरी

रा
जेश कुमार पूनिया- की कलम से


जब गरमी सताये, बंदा सांझ को नहाये
समझो, रसीले आम खाने के दिन आये


सुबह शाम दिल जब तराने गाये

लीची, अंगूर, खरबूज, जामुन भाये


हल्की ब्यार सोंधी हवा और कोयल गाये

समझो रसीले आम खाने के दिन आये


रख दो थाली आम की अब जो काट ही लाये

मजा है तो जब है कतले आम तू ही खिलाये


दुआ है मेरी, जन्मदिन  नित्या का इस बार ऐसा आये

चिंता न हो परीक्षाओं की,  मजे से ब्लैक फोरेस्ट खाये 


है इस साल मजा नित्या का जन्म दिन मनाने का

क्यों हो गया इतना बुरा हाल इसी साल जमाने का


साले, हमे भी ऐसे कमरे में ठहरा देते हैं,

कि भाई पोपुलर की याद दिला देते हैं।


साहब, साले साहब ऐसा लज़ीज खाना खिला देते  हैं

हज़म भी नहीं होने पाता है, दूध मीठा पिला देते हैं


कार की डिक्की में मज़ा सोने का दिला देते हैं

हवा डिक्की तक ठंठी मिले एसी बढ़ा देते हैं


साला जीजा, जीजा, साला नजर आता है

इस सीट से,  रिश्ता, बदला नजर आता है



तुने कितने कसीदे काढ़े, कितने रंग भरे  फिर दुनिया का ये  हाल है

क्यों एक रंग जो दूनिया में सबसे ज्यादा बह रहा वह केवल लाल है


सोना चांदी कोई न खाता, पेट भरे सबका वही चावल रोटी दाल है

क्या लाये थे क्या ले जाना,  समझने को कितना ये अच्छा साल है






2 comments:

  1. Replies
    1. ये लिखाई तो मेडम मीनू की नजर आ रही है। है ना.. धन्यवाद जी

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