एक लड़का जो कभी भी नमस्ते या अभिवादन नहीं करता था। वह लड़का आज तीसरी बार मिला है, हर बार अंकल नमस्ते कह रहा है। थोड़ी देर बाद मैं गैलरी में गया तो वह सामने ही खेल रहा था, फिर अंकल नमस्ते कहा, बात समझ में नहीं आ रही कि आखिर वह एकदम इतना कैसे बदल गया। पिछले दो तीन दिन से देख रहा हूँ कि वह रोज ही नमस्ते कर रहा है।
मैं जब अपनी कार को साफ कर रहा था तो वह फिर मेरे पास आ गया, और नमस्ते अंकल, कहकर अपनी फुटबॉल से खेलने लगा। मेरे को ये बात अचंभित कर रही थी कि जो लड़का कल तक सामने पड़ने पर भी पास से ऐसे निकल जाता था कि जैसे कभी देखा ही न हो। जबकि वह दो घर छोड़कर रहता है।
बच्चों का दिल मक्खन से भी मुलायम होता है यह बात मुझे अब सही जान पड़ती थी कि मां बाप यदि रोके तब ही अड़ोसी-पड़ोसी या फिर जानकार को बच्चे नमस्ते करना बंद कर देते हैं। मेरा तो उसके मां-बाप से कभी कोई झगड़ा भी नही हुआ, मुझे पहले क्यों नहीं करता था नमस्ते?
मैं अभी अनुमान ही लगा रहा था कि वह दौबारा मेरे पास आया और कहने लगा, अंकल आप पहले रेस लगाते थे? जरुर मेरे बेटे ने इसे बताया होगा, क्योंकी वह जानता है कि मैं स्टेट लैवल की दौड़ में हिस्सा ले चुका हूँ, इसके अलावा कई बार मेैराथन भी दौड़ा हूँ और श्रेष्ठ धावक का खिताब भी मिल चुका है।
यह उचित न समझा कि पूछुं, किसने बताया? सिर्फ गर्दन हिला कर हांमी भर ली। अंकल मुझे भी रेसर बनना है। आप मुझे गर्मियों की छुट्टी में रोज रेस करना सिखाओगै? बेटे, पहले अपने घर में पूछ कर आओ कि कोई ऐतराज तो न होगा। अंकल आप चिंता न करें मेरे पापा मुझे मना नहीं करेंगे।
ठीक है तो मैं तुम्हें कल सुबह 5 बजें इसी पार्क में मिलूंगा। जूते, टी-शर्ट, लौअर पहन कर आना, अब जाओ।
एक सप्ताह हो गया वह लड़का दिखाई नहीं दे रहा था, सो पता करने गया उसके पिता बोले घर में सभी पाँच बजे तक उठ जाते हैं, लेकिन रवि को उठाने के लिये भाष्कर महाराज भी खिड़की खटखटा कर आगे सरक लेते हैं। भाष्कर जी जानते हैं कि जब आज तक सही समय पर नहीं उठा तो आज क्या ख़ाक उठेगा, एक दो बार जगाया फिर रोज की तरह आगे निकल गये।
वह शर्म के मारे आपके सामने नहीं आ रहा। उसके पिताजी बारबार उसे अंदर वाले कमरे से बाहर बुला रहे थे। कुछ देर में वह अंकल नमस्ते कह कर मेरे सामने बैठ गया। मैंने कहा बेटे क्या हुआ? तुम तो पहले ही दिन नहीं आये और आज इतने दिन बाद मैे ही पुछने आया हूँ, बताओ क्या हुआ?
वह शर्म के मारे आपके सामने नहीं आ रहा। उसके पिताजी बारबार उसे अंदर वाले कमरे से बाहर बुला रहे थे। कुछ देर में वह अंकल नमस्ते कह कर मेरे सामने बैठ गया। मैंने कहा बेटे क्या हुआ? तुम तो पहले ही दिन नहीं आये और आज इतने दिन बाद मैे ही पुछने आया हूँ, बताओ क्या हुआ?
अंकल मैं सुबह जाग नहीं पाता जब आँख खुलती हैं तब 9 बजे होते हैं, मैं क्या करुँ आपके सामने आने में भी मुझे लज्जा आ रही थी, इसलिये मैंने बाहर खेलना भी छोड़ दिया। बस, इतनी सी बात के लिए तुमने बाहर खेलना ही छोड़ दिया। चलो कोई बात नहीं, बेटा ये बताओ, तुम रात का भोजन कितने बजे तक कर लेते हो? अंकल हम सभी 11 बजे भोजन करते हैं। उसके बाद एक घन्टा टीवी देखते हैं।
मुझे लैक्चर देना अच्छा नहीं लगता है लेकिन जब किसी को यह लैक्चर देने से नया जीवन मिल रहा हो तो क्यों न दूँ।
बेटे, सुबह की हवा आजकल कितने लोग खाते हैं, सारा दिन मंहगी चीजें तो खाते हैं, लेकिन इस देह के लिये सबसे ज्यादा जरुरी चीज ताजा हवा होती है और जिसका कोई मोल भी नहीं उसे कोई नहीं खाता। कोई भोर में उठे तो खाये ना।
बेटे, तुम ये दृढ़ निश्चय करो कि मुझे सबसे तेज धावक बनना है, जितना पक्का निश्चय करोगे उतने ही अच्छे धावक बनोगे। जैसा हम सोचते हैं वैसा ही हम बन भी जाते हैं, इसलिये हमेशा शुभ और बड़ा विचार करो।
बेटे, तुम ये दृढ़ निश्चय करो कि मुझे सबसे तेज धावक बनना है, जितना पक्का निश्चय करोगे उतने ही अच्छे धावक बनोगे। जैसा हम सोचते हैं वैसा ही हम बन भी जाते हैं, इसलिये हमेशा शुभ और बड़ा विचार करो।
धावक या खिलाड़ी के जीवन में नियम, संयम का बहुत महत्व होता है। मनोबल के साथ साथ शारीरिक शक्ति भी चाहिये इसलिये सबसे पहली ताकत की चीज जो खानी है वह सुबह की हवा। इस को प्राण वायु भी कहते हैं। यह प्रात:काल ही भरपूर मिलती है, इसलिये इसे खाने के लिये तुम्हे ये बिस्तर 5 बजे तक छोड़ना ही होगा। छोड़ोगे न?
इसके अलावा, अंकुरित अनाज जैसे काला चना, मूंग, कभी सोया, या दूध, जो तुम्हे मुफिद लगे, रोजाना दोड़ लगाने के बाद जरुर लेना।
असल में कई चीजें एक दूसरे से इस तरह से उलझी हुई हैं कि समझ नहीं आता की कैसे सुलझाई जायें। हम समय पर सोने की आदत नहीं बदलेंगे तो कैसे ताजा हवा का पान कर सकते हैं?
ये देर से सोने और देर से जागने का चक्र तोड़ना कोई आसान काम नहीं है। उसने मुझे इस तरह से देखा जैसे मैने उसके मन की बात कह दी हो। बेटे, लेकिन ये चक्र तोड़े बिना भोर की बेला का आंनद भी तो नहीं मिलता।
जब सुर्योदय से पहले बिस्तर न छोड़ने की लाचारी हमें इतना अभागा बना दे, कि घर की कोई परवाह ही न रहे। घर के सारे नित्य कामों को करके सभी अपने कामों पर चले जायें और आप बिस्तर पर ही अंगड़ाईयां लेते रहें। यह वही समय है जब आत्मचिंतन द्वारा भूल सुधार करके अपनें ध्येय और कर्तव्यों को हृदय में आत्मसात कर लें।
रातोंरात पढ़ने वाले जब सुबह देर तक सोते हैं, तब वे अपनी नींद पूरी करते हैं। आप अपनी प्राकृतिक नींद के समय को बदलकर पठन पाठन कर रहे होते हैं, वह समय निंद्रा का होता है, यह नींद न लेने से सारे दिन थकान बनी रहेगी।
आप दिन में सबको कहेंगे कि शोर न करो, मुझे सोने दो, तब आवाजें आपकी नींद में खलल पैदा कर ही देंगी, जिससे यह होगा कि सिरोवेदना या शरीर में थकावट, भारीपन अथवा लगातार मानसिक तनाव रहने से कुछ समय बाद नींद न आना जैसी गंभीर समस्यायें होने लगेंगी। अच्छा, अब चलता हूँ, तो बेटे कल आओगे क्या?
No comments:
Post a Comment