Thursday, March 7, 2019

गतांक से आगे..

गतांक से आगे..

एक और दिलचस्प किस्सा याद आ रहा है, एक लड़का जो डीजल जैनरेटर का मैकनिक था, वह भी शराब के नशे में चूर रहता था, ना खाने की सुध रहती ना ओढ़ने पहनने की, किसी की शादी-ब्याह हो तो उसे कौन रोक सकता था, किसी के मरे पर भी उसे दारु से परहेज ना होता, पुरे गाँव भर में वही एक ऐसा शख्स नहीं था उस गाँव में लगभग हर गली में एक से बढ़कर एक शराबी बसते थे। जब कभी उनसे बात होती तो दूर से ही होती क्योंकी  शराब की गंध उसके मुहँ से आती जोकि बेहद नागवार गुजरती। उसके दो भाई ओर भी थे जो उससे छोटे थे, 8वीं 9वीं में पढ़ते थे, जब बड़ा भाई रात गये घर न लोटता तो उन्हें रात को गाँव की गलियों से, शराबियों के ठिकानों से, कभी नाली से उठा कर लाने की जिम्मेदारी दे रखी थी, नशे में धुत अपने बड़े भाई को ढूंढने के कारण वे कभी-कभी अपना होमवर्क भी पूरा नहीं कर पाते थे।
पानी केरा बुदबुदा, अस मानुस की जात,
एक दिना छिप जाएगा, ज्यों तारा परभात.

कबीर जी ने कहा है कि, जिस तरह पानी के बुलबुले, इसी तरह मनुष्य का शरीर क्षणभंगुर है। जिस तरह प्रभात होते ही तारे छिप जाते हैं, उसी प्रकार ये देह भी नष्ट हो जाएगी, उसे अपनी जीवन लीला समाप्त होती नजर आने लगी थी, कुछ दिनों से वह दुखी रहने लगा था, वह चाहकर भी शराब छोड़ नहीं पा रहा था, वह मन ही मन अपने आप को कोसने लगता, मजबूरीवश जैसे ही शाम होती उसके कदम ठेके की और तेज गति से बढ़ने लगते, यूँ ही उसकी जिन्दगी चल रही थी। 
  
एक दिन उसे स्वप्न में कुछ दिखाई दिया और मन में हरिद्वार जाने का विचार पक्का कर लिया, केवल मन ही किसी व्यक्ति का मित्र या शत्रु हो सकता है। उसके पास एक हजार रुपये शेष थे, उसे ज्ञात था कि वह सात सौ रुपये में वहाँ जाकर आ सकता है, उसने उसी शाम 200 रुपये कि शराब की बोतल खरीद कर पी ली, और अगले रोज जाने की तैयारी कर ली, अब केवल 800 रु. ही बचे थे, उसने सफर के लिए पच्चास रुपये का एक पव्वा खरीद लिया और चलने लगा, चलते चलते फिर उसी सपने का विचार मन में आया, वह भाग कर पव्वा वापस करने गया, और रुपये वापस ले लिये, ठेके वाला उसे कई सालों से जानता था, इसलिये उसने बिना आनाकानी के रुपये वापस लौटा दिये, और कहने लगा कि आज क्या हुआ, आज तक तो कभी तुम लोटाने नहीं आये, वह बिना कोई जवाब दिये वहाँ से चल दिया।

हर की पौड़ी पर जा कर ही दम लिया। वहाँ पहुँच कर उसने प्रार्थना की हे भोले नाथ, मैं ये सपथ लेता हूँ कि आज से कभी भी शराब को न छूऊँगा। जब वह वहाँ भ्रमण कर रहा था उसे एक लड़की से प्यार हो गया और कुछ दिन बाद उसे ब्याह कर अपने गाँव ले आया। उसने दौबारा से अपना काम करना शुरु कर दिया, गाँव मे डीजल जैनरेटर का बहुत काम मिलने लगा, आज उसके दो लड़के हैं जो पढ़ाई कर रहें हैं।

देखिये विधाता का करिश्मा एक शराबी को कैसे नेक राह दिखा दी, उसे बदल दिया, इस तरह वह गाँव वालों के लिये मिसाल बना गया, उसे देखकर दुसरे साथी भी शराब छोड़ने लगे। 

No comments:

Post a Comment