Tuesday, March 12, 2019

मधुर भजन


मधुर भजन

एक बार मुझे आस्था चैनल पर एक साधु महाराज जी का प्रवचन सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, उस समय सुबह के 8.00 या 8.15 बजे होंगे, मैं उनके प्रवचन के बीच में भजन सुनकर आत्मविभोर हो गया, आत्मिक सुख देनेवाली आवाज के धनी बाबा का भजन ह्र्द्य की गहराई को छू रहा था, 10 मिनट भजन सुनने के बाद मुझे पुरे दिन एक अलग ही आनन्द की अनुभूति हुई, कई दिन तक मुझे भजन के शब्द थोड़े याद रहे, फिर केवल एक लाईन ही याद रही जो थी, ई ऐसे ही ना मानी हैं कई महीनों बाद मुझे ये भजन बहुत याद आ रहा था, लेकिन ना तो साधु बाबा का नाम याद था, ना ही ठीक से भजन के बोल।

हरि बिन संकट कौन निबारे, मुझे कुछ भी सूझ ही नहीं रहा था, मेरी उस भजन को सुनने के लिये व्याकुलता बढ़ती जा रही थी, कि कहीं से वहीं मनोहारी भजन दोबारा सुनने को मिल जाए, कई बार आस्था, संस्कार, आदि चैनलो को देखा, पर दौबारा उस भजन को ना सुन पाया। सोचा कि यू-ट्यूब से मिल जाऐगा, लेकिन वहाँ से भी निराशा ही हाथ लगी।

काफी अरसे बाद आज जब में ये बात भूल गया था, अचानक एक यू-ट्यूब का लिंक आ गया. जो उन्ही सन्त का था, मैं उनके चेहरे को पहचानता था, इसलिए उन्हे देखते ही भगवान का शुक्रिया किया, उनका नाम स्वामी श्री राजेश्वरानन्द जी था, चूंकि, बिना किसी विशेष प्रयास के ही ये लिंक मिल गया था, इसलिये मैं अपने आप को बहुत भाग्यशाली समझ रहा था, और सोच रहा था कि, बिन माँगे मोती मिले, माँगे मिले न भीख, हे ईश्वर तु महान है, अनेक धन्यवाद।
विधि का विधान कोई जान ना पायेगा, मैंने उनके कई भजन लगातार सुने,

सन्तों के संग जिनका प्रेम हो,
सन्तन के संग लाग रे तेरी बिगड़ी बनेगी,
संत-संगती की अदभूत महिमा,
यहाँ मिट जाते दाग रे तेरी बिगड़ी बनेगी।
अभी भजन सुन ही रहा था, कि एक और लिन्क ने मेरी खुशी छीन ली, जिसमें उनके ब्रह्मलीन की खबर छपी थी, वे ह्रद्याघात से 10 जनवरी 2019 को चल बसे थे। दिल बहुत आहत हुआ जाने ऐसा क्यों होता है जो मन को भाता है...।

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