PASTOR हो गये
बात पुरानी है, एक लड़का जिसके जीवन में अनेक
विघ्न बाधाएं आई , पहले तो 15-16 वर्ष की उम्र में उसके पिता जी का देहान्त हो गया
फिर माँ की तबीयत खराब रहने लगी, देखरेख करने में वह इतना थक जाता था कि अपनी
पढ़ाई लिखाई सही से नहीं कर पाता था, समय ने उसे इतना तोड़ दिया कि वह जीवन से
हारने लगा, उसे मर जाने के विचार घेरने
लगे, जीवन घोर अंधकारमय दिखने लगा, चारों दिशायें उसके अन्दर एक भय उत्पन करने लगीं,
लेकिन उसने कठिन मेहनत की और सरकारी नौकरी मिल गई, उसे एक नई राह दिखाई देने लगी
थी, अब सब तरफ एक नई उम्मीद जग रही थी। थोड़े
दिनों में ही उसकी शादी हो गई, और उसके बाद वह सारे शौक पुरे करने लगा, कभी फिल्म
तो कभी पत्नी के साथ यहाँ वहाँ पार्टी, पिकनिक में जाता।
कुछ समय बाद वह धीरे धीरे
कभी शराब पीकर कभी सिगरैट पीता नजर आता, लेकिन कुछ सालों के बाद अपनी तन्ख्वाह का
बड़ा हिस्सा वह शराब और सिगरैट में खराब
करने लगा, उसे कोई भी दिन हो शराब जरुर चाहिए होती, धीरे धीरे उसे शराब की लत इस
कदर लग गई कि कभी अपने घर ही नही जाता और दफ्तर में ही सो जाता अब सभी उसके बारे
में सहकर्मी आपस में बात करने लगे और चिन्ता करने लगे कि उसे कैसे सही राह पे लाया
जाये, वह अब उधार भी मागंने से नहीं हिचकता था, जब किसी से उधार लिया तो वापस नहीं
देता इस वजह से दफ्तर के यार-दोस्त भी अब दूरी बनाने लगे उससे, कभी बिना खाये ही
सो जाता, सुबह कुल्ला भी शराब से शुरु हो चुका था, शरीर धीरे धीरे क्षीण होने लगा
था, उठने बैठने में उसे दिक्कतें होने लगीं थी, लैट्रीन में उसने एक रस्सी बाधं
रखी थी जिसकी सहायता से वह टोयलेट में बैठता था।
एक बार मैने भी उसे समझाने की
नाकाम कोशिश की थी, उसने मुझे हसँ के कहा था कि मेरे दोस्त ऐसी कोई बात नहीं
चिन्ता ना कर। एक दिन उसने सरकारी नौकरी भी छोड़ दी थी या उसे बर्खास्त कर दिया था
पता नहीं लेकिन नौकरी चली गई थी। बीस साल बाद एक मित्र ने बताया कि वे अभी जिन्दा
हैं और Pastor हो गये हैं, ये सुनकर मुझे हैरानी भी हुई और उपरवाले पर
भरोसा भी।
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