एक शुरुआत
अपने लिए तो सभी जीते
हैं औरों के लिए जीने वाले विरले ही होते हैं, समाज सेवी बन कर कुछ कर दिखाना बहुत
बड़ी बात होती है। समाज में अनेक छोटे-बड़े समाज सेवी दिखाई दे जायेंगे, समाज में
व्याप्त समस्याओं के निराकरण, निदान के लिये समाज सेवी अपनी निस्वार्थ सेवा देते
रहे हैं उन्हे आध्यात्मिक चेतना से ही सही कर्म का ज्ञान मिलता है, समाज सेवा के
नाम पर सरकार से जो अनुदान मिलता है उसका सद्उपयोग हो ये आवश्यक है।
वैसे आजकल कई एन.जी.ओ.
अनाथ बच्चों के उत्थान के लिए कार्य कर रहें हैं, कोई बुजूर्गों की सेवा, कोई दिव्यागों
की देखभाल, कोई अन्धे-बहरे-गूंगे आदि की सेवा में रत हैं। मुझे एक बार जोधपुर,
राजस्थान में नारायण सेवा संस्थान जाने का मौका मिला, जहाँ पोलियो ग्रस्त मरीजों
का निशुल्क इलाज होता है, उन्हे मुफ्त इलाज के अलावा कई प्रकार के स्वरोजगार के
प्रशिक्षण दिये जाते हैं, जरुरतमदों को बैसाखियाँ, तिपहिया साईकिल बाँटी जाती हैं,
साथ ही आपसी रजामदीं (पसंद) से विवाह भी संपन्न कराये जाते हैं। वहाँ पहुँच कर
देखा और जाना कि सही में निस्वार्थ भावना से समाज की सेवा करने का सुख क्या होता
है।
सदियों से हमारे सन्तों, महात्माओं, फकीरों, सुफी सन्तों ने समाज की सेवा कि, किसी न किसी ढ़ंग से
हमें सही तरह से जीने की राह दिखाते रहें हैं, चाहे सन्त कबीर, रैदास, नानक हों
चाहे फकीर बुल्ले शाह, हजरत निजामुद्दीन, या विनोबा भावे, महात्मा गाँधी आदि,
अनगिनत महान विभुतियों ने समाज की
कुरितियों को दूर करने का बीड़ा उठाया।
आओ एक बेहतर शुरुआत करें
कुछ छोटा ही सही, अच्छा करने की, मैं कोई ज्ञान नहीं बाँटना चाहता बस याद दिलाना
चाहता हूँ, अगर रोजाना अग्रिम गर्मियों में एक जल का छोटा सा बर्तन अपने घर की छत
अथवा आगँन में रखने की आदत डालें तो पक्षिय़ों, जानवरों के प्रति आपकी एक छोटी ही सही परन्तु विशेष सेवा होगी।
सराहनीय प्रयास
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