ऐसे लगा जैसे कोई आज आजाद, शोषित हो गया
थका हारा सा मायूस बच्चा खूब पोषित हो गया
भले ही हृदय में कोरोना बन शूल रोपित हो गया
नित्या, प्रतिशत 'अठानबे' लाई, अंक शोभित हो गया
शाबासी तुझे बार बार, देख लक्ष्य भी अचंभित हो गया
**
लक्ष्य
जब पढ़ने की ठानी, सवाल मुश्किल, आसान हो गया
खेला जिस मोबाईल से, आज पढ़ाई का सामान हो गया
मैने कहा, पत्नी से कैसे लायेगा अकं अच्छे, जो खाते ही सो गया
बेटा बोला, अबकी देखना, क्या लाता हूँ, भूल जाओ जो हो गया
है विश्वास मुझे उस पर भी, बीज उसके दिल में उग तो गया
क्या असंभव है दुनिया में, समय पर लक्ष्य, लक्ष्य चुन जो गया

No comments:
Post a Comment