*छोड़ झमेला*
कौन अच्छा है कौन बुरा है। यह धारणा बनाने से पहले आओ कुछ विचार करें। एक यंत्र जो ध्वनि ग्रहण करता है, जिसे हम रेडियो कहते हैं। उसमें यांंत्रिक प्रणाली होती है, जो किलोह्ट्ज की भाषा में होती है। उसका सरल अर्थ होता है कि एक किलोह्टज अर्थात एक हजार चक्र प्रति सेैकिंड।
रेडियो फ्रिक्वेंसी के अलग अलग आयाम होते हैं जिन्हें लघू तरंग, एएम, एफएम के मोड्यलेशन कहते हैं। जब हमें किसी आवृति (Frequency) पर कार्यक्रम को सुनना अच्छा नहीं लगता तब हम दुसरी फ्रिक्वेंसी तलाशने लगते हैं। हम जब चाहे रेडियो की फ्रिक्वेंसी बदल सकते हैं।
हम सांसों को रोक कर देखें, यहां यह बात समझने वाली है कि हमने रोकने का भरसक प्रयास किया लेकिन कुछ समय बाद ही सांस रोक नहीं सके। क्या उसी प्रकार अपनी सांस जब तक हम चाहें बाहर रोक सकते हैं? यहां हमारी एक नहीं चली। हमारे सो जाने के बाद कोई तो है जो हमारी धड़कन को चला रहा होता है। अपने आप ही सांस आती जाती है। हम तो सोये होते हैं।
परमात्मा की फ्रिक्वेंसी इसी शरीर रुपी रेडियो यंत्र में ही है। हमें वह फ्रिक्वेंसी नहीं मिली तो फिर चाहे सारा जगत अच्छा हो, हमें सब मे बुराई ही दिखाई देगी और आत्मानंद की प्यास बनी रहेगी।
छोड़ झमेला झुठे जग का, कह गये दास कबीर,
पार लगायेगे एक पल में तुलसी के रघुबीर.
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