Sunday, May 31, 2020

बेशक



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हमारी कोशिश रहती है कि जो भी अच्छा है हमें मिले, सभी खुशियां हमारे जीवन में रहें, लेकिन हम बहुत छोटी छोटी खुशियों को नहीं देख पाते, हमें वही खुशी नजर आती हैं जो हमें भोतिक सुख प्रदान करती हैं बाकि तो सब बाते तुच्छ ही नजर आती हैं। माना हमें बचपन से यही सिखाया गया होता है कि खूब पढ़ लिखकर बहुत बड़े अफसर बनो, ताकि दुनिया की सारी खुशियों को तुम पा सको, बस फिर हम उसी राह पर चलते रहतें हैं और एक दिन उस मुकाम को हासिल भी कर लेते हैं जिसकी हमारे माता पिता के साथ हमने भी इच्छा की थी,

बुजुर्गों की सारी बातें सही हैं या नहीं कह नही सकते लेकिन, ये बात मुझे अब समझ आने लगी हैं कि उच्च शिक्षा से उच्च पद तो मिल सकता है लेकिन उन सारी खुशियों का क्या, जिसे हम तलाश रहें हैं जो धन से हासिल ही नहीं हो सकती, कुछ ऐसे ही व्यक्तियों को हम व्यक्तिगत तौर पर जानते भी हैं, जिनके पास धन दौलत की कोई कमी नहीं है मगर, दुखी हैं उदास हैं, जीवन से हताश हैं। 

सुख नहीं मिल रहा क्योंकि बेटे साथ नहीं रहते, या अपने पास रखना नहीं चाहते। पत्नी चल बसी और अपना शरीर साथ नहीं देता। कई बिमारियों ने जकड़ लिया। बेटियों ने मुड़ कर नहीं देखा शायद इस डर से कि उन्हें ही ना देखभाल करनी पड़ जाए। जिन्होने, बच्चों के लिए सारा जीवन खपा दिया, दिन और रात नहीं देखा। उन्हें इस लायक बनाया कि अपने पैरों पर खड़े हों जाऐं।

आज वही मां बाप सांसारिक जीवन की उन खुशियों से मरहूम हैं जिनके होने मात्र से इन्सान प्याज, चटनी के साथ रोटी खा कर भी रह ले। लगता नहीं कि हम इन खुशियों को कहीं से खरीद सकते हैं।
बेशक, हम इन बुजुर्गों के साथ बैठ कर इन्हे खुशी के पल दे सकते हैं। आपसे और क्या चाहिये, बस, इनके पास बैठकर दो बोल प्यार के बोलें और आनन्द से रहें।


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