राजेश
कुमार पूनिया,
विचार ये अति भारी है।
|
कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है। |
|
हर नारी गंगा जमुना सरस्वती ही होती है। |
|
सब दायित्व निभा, अपना सर्वस्व खोती है। |
|
|
|
कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है। |
|
नारी चलती फिरती घड़ी चौबीसा होती है। |
|
जब देखूँ काम करें, न जाने कब सोती है। |
|
|
|
कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है। |
|
नारी भूखे रहकर, चाँद की बाट जोती है। |
|
परोस भोजन सबको, झूठे बरतन धोती है। |
|
|
|
कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है। |
|
किस समझ बूझ से, एक एक पैसा जोड़ा । |
|
बुरे वक्त में काम आये, जब रहा धन थोड़ा । |
|
|
|
कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है। |
|
नारी सुशील, सुमन सी कोमल होती हैं |
|
जब घटे सम्मान, तब गिरते उसके मोती हैं |
|
|
|
कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है। |
|
नारी का सम्मान जरुरी, ये प्यार की पाती हैं। |
|
क्यों देते हैं धोखा इनको, ये प्रेम गीत गाती
हैं। |
|
|
|
कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है। |
|
नारी ही नारी को, क्यों अशक्त बताती है। |
|
है वह बाड़ कंटिली जो स्वयं खेत खाती है। |
|
|
|
कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है। |
|
नोवें माह नव जीवन देती और स्वयं भी पाती
है। |
|
हमें पिता का गौरव भी, नारी, मां बन कर लाती
है |
|
|
|
कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है। |
|
बच्चियां जब ब्याही जाती, तब पति ही भगवान और
मालिक था |
|
साफ हुआ सब संविधान से जो नारकीय जीवन का
कालिख था |
|
|
|
कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है। |
|
कैथरिन मायो, लेखिका ने, ‘मदर इंडिया’ पुस्तक में
जो लिखा था |
|
शब्द नहीं, था हर्द्य विदारक, वो नारी दुर्दशा, रस मीठा भी फीका था |
|
|
|
कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है। |
|
भारत रत्न ने जब तक, दिया देश को, अपना
संविधान नहीं था |
|
नारी का था बढ़ता शोषण और कोई अधिकार नहीं था |
|
|
|
कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है। |
|
हर क्षेत्र में कंधे
से कंधा मिलाकर, देश सेवा में तत्पर रहती है। |
|
चूल्हा चौका, झाड़ू
पौछा, नित्य निरन्तर, ना और से कहती है।
|
|
|
|
आज, कविता मंचन की
संयोजिका व संचालिका स्वंय एक नारी
है |
|
कौन अशक्त, कृपया बतलाऐं ‘राजेश
’ सबका पहले ही आभारी है |
|
|
No comments:
Post a Comment