Wednesday, February 22, 2023

 द्वारा: राजेश कुमार पूनिया                                

 

 विचार ये अति भारी है।

कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है।

हर नारी गंगा जमुना सरस्वती भी होती है।

सब दायित्व निभा, अपना सर्वस्व खोती है।

 

कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है।

नारी चलती फिरती घड़ी चौबीसा होती है।

जब देखूँ काम करें, न जाने कब सोती है।

 

कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है।

नारी भूखे रहकर, चाँद की बाट जोती है।

परोस भोजन सबको, झूठे बरतन धोती है।

 

कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है।

किस समझ बूझ से, एक एक पैसा जोड़ा ।

बुरे वक्त में काम आये, जब रहा धन थोड़ा ।

 

कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है।

नारी सुशील, सुमन सी कोमल होती हैं

जब घटे सम्मान, तब गिरते उसके मोती हैं

 

कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है।

नारी का सम्मान जरुरी, ये प्यार की पाती हैं।

क्यों देते हैं धोखा इनको, ये प्रेम गीत गाती हैं।

 

कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है।

नारी ही नारी को, क्यों अशक्त बताती है।

है वह बाड़ कंटिली जो स्वयं खेत खाती है।

 

कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है।

नोवें माह नव जीवन देती और स्वयं भी पाती है।  

हमें पिता का गौरव भी, नारी, मां बन कर लाती है

 

कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है।

बच्चियां जब ब्याही जाती, तब पति ही भगवान और मालिक था

साफ हुआ सब संविधान से जो नारकीय जीवन का कालिख था

 

कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है।

कैथरिन मायो, लेखिका ने, मदर इंडिया पुस्तक में  जो लिखा था

शब्द नहीं, था हर्द्य विदारक,  वो नारी दुर्दशा, रस मीठा भी  फीका था

 

कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है।

भारत रत्न ने जब तक, दिया देश को, अपना संविधान नहीं था

नारी का शारीरिक, मानसिक शोषण, और कोई अधिकार नहीं था

 

कौन अशक्त कौन सशक्त, विचार ये अति भारी है।

हर क्षेत्र में कंधे से कंधा मिलाकर, देश सेवा में तत्पर रहती है।

चूल्हा चौका, झाड़ू पौछा,  नित्य निरन्तर, ना और से कहती है।

 

आज, कविता मंचन की संयोजिका व संचालिका स्वंय एक नारी है

कौन अशक्त, कृपया बतलाएं  राजेश सबका पहले ही आभारी है

 

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