ल्यो खब़रिया याकी
ऐ चोरन के सरताज
ये कोरन है यहाँ आयो
ल्यो खबरिया याकी
हमका बहुते है सतायो
ना कहीं हम जावत आवत
या न अच्छो दियो फंसायो
ऐ चोरन के सरताज
ये कोरन है यहाँ आयो
बच्चो बच्चो है घबरायो
पढ़न बाले दुबके परे है
ये क्या जाने पीर परायो
ऐ चोरन के सरताज
ये कोरन है यहाँ आयो
जान से मौत को खेल, खेल गयो
दोस्त वो मेरो सदा को सो गयो
आंकड़ा, छ हजार पार भयो
देर कई, सगरी और उजाड़ भयो
ऐ चोरन के सरताज
राजेश कुमार पूनिया- दीप
जान से मौत को खेल, खेल गयो
दोस्त वो मेरो सदा को सो गयो
आंकड़ा, छ हजार पार भयो
देर कई, सगरी और उजाड़ भयो
ऐ चोरन के सरताज
ये कोरन है यहाँ आयो ।।
ल्यो खबरिया याकी
हमका बहुते है सतायो
ल्यो खबरिया याकी
ल्यो खबरिया याकी
हमका बहुते है सतायो।।
राजेश कुमार पूनिया- दीप
बहुत खूब। आपकी कविता की जितनी प्रंशसा की जाए कम है।
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