जब दुनिया भारी तंग हुई
जब दुनिया भारी तंग हुई,
सरहदें सारी बंद हुई
जालिम 'कोरोना' तेरी आँखे न बिलकुल नम हुई
तुम आये हो क्या बदला
लेने हम सब से
थके हम इंसा अब दुआयें,
अल्हा, प्रभु रब से
जान से खेल रहा सबकी
अन्धा होकर कब से
कौन है कैसा है कहता नहीं
एक शब्द लब से
खम्बे से नरसिंह निकला आ
प्रभु अब नभ से
करो न देरी पल की, दवा बन
प्रभु आओ अब से
राजेश कुमार पूनिया -दीप
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