Sunday, March 15, 2020

माननीय अशोक चक्रधर जी (बड़े भाई) को राजेश कुमार पूनिया की तुच्छ भेंट


हे हरि (प्रकृति के देवता) सारे संसार में हाहाकार मचा है प्रभु

बात-बात पर, कोरोना जुबां पर आता है

कहते हैं जूस को रस, हम सब हिन्दी में

रस के नाम से वायरस ध्यान में आता है

हे मदन मोहन, जीवन में ऐसा रस भर दो

दुःख दारुण न हो दिलों में राजेश मन कर दो

हे गोविंद, कोविड का भय हृदयों से हर दो

और ना कोई इच्छा, बस इतना ही कर दो

हे हरि, केवट के खिवैया, पार हमें भी कर दो

दवा न दारु कहीं इस रस की, भटके दर दर को

हे बल्लभ जिसका कोई नहीं, इलाज उसका कर दो

तेरी याद में बीते उमरिया, हे राम झोलियां सबकी भर दो

धरा पर सब एक बराबर बस गुरु ग्यान की बरकत कर दो


माननीय अशोक चक्रधर जी (बड़े भाई) को राजेश कुमार पूनिया की

 तुच्छ भेंट

2 comments:

  1. बहुत ही सुंदर कविता और उस से भी सुंदर मन के भाव

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