नारी-शक्ति
अपने पति के गुजर जाने के बाद वह बेटे के लिए उसी
दफ्तर में जिस में उसके पति नौकरी करते थे, आया करती। उसे अपने बेटे को अनुकंपा के
आधार पर नौकरी के लिए दफ्तर में चक्कर काटते-काटते दो साल हो गये थे। वह कभी अकेले
कभी अपने बेटे के साथ आया करती। सभी स्टाफ अधिकारी व कर्मचारी उनसे अति संवेदना व
इज्जत के साथ व्यवहार करते थे।
कोई अनहोनी कब हो जाएगी किसे पता। परिवार की सारी
खुशियाँ उनकी आकस्मिक मौत की खबर ने छीन लीं। जीवन का उत्साह पलायन कर गया। उसके न
होने से घर की सारी जिम्मदारी उसकी पत्नी के कंधों आ गई। वह सारे साज-श्रृंगार भूल
गई, मांग
में सुहाग का सिंदूर अब छूट गया। सुहागन ही करवाचौथ के चादं का इन्तजार करती है
बीते साल मैनें कितना इन्तजार किया तब जाकर चांद निकला था। वे कुछ भी कर रहे होते
वहीं से मुझे आवाज देते कि आज तो चांद ने बहुत इंतजार करवा दिया तेरा, कितनी भूख लग रही
होगी तुम्हे। मैं कहती की खाये बिना मरी नहीं जा रही हूँ। इनकी एक नजर घर पर दूसरी
आसमान पे होती अभी दिखाई दिया कि नहीं, बार-बार छत पे जाकर चांद देखा करते। जब चांद
निकलता तो वे आवाज देकर कहते कि सुनो चांद निकल आया चलो छत पर जल्दी चलो। हाय,
क्या अब कभी भी मुझे
चांद का इतंजार नहीं करना। मैं अपने पति की दीर्घ आयु के लिए ही तो करवाचौथ का
व्रत रखती थी। जब चांद को अर्ध्य देती तो ये ही कामना करती की सभी सुहागन रहकर
परलोक सिधारें। मुझे क्या पता था कि वो मेरी विनती सुन ही नहीं रहा होगा।
शहर में अगर अपना कोई स्थाई घर है तो आपकी आधी
समस्या हल हो गई समझो। सरकारी मकान है तो छोड़ना ही पड़ेगा। आजकल बस उसे यही
चिन्ताएं खाये जा रही थीं कि बेटे की नौकरी लग जाए, बेटी की शादी हो जाए और सिर पे छत मिल
जाए। पैंशन तो आधी तनख्वा से भी कम हो गई थी। कुछ व्यक्तियों से उन्होनें उधार भी
लिया हुआ था जो हजारों में था। बस एक ही आस पर मुंह धोये हुए थी कि उसके बेटे की
नौकरी लग जाये, या तो कहीं और नहीं तो अनुकपां के आधार पर उसी दफ्तर में जिसमें वे
नौकरी करते थे।
एक दिन प्रशासन खण्ड के बड़े बाबू के सामने जब
उसकी आंखो से आसूं समन्दर बन कर बह गये तब बड़े बाबू को कुछ भी नहीं सूझ रहा था कि
उसे चुप कैसे कराये। वह हाथ जोड़कर अपने बेटे की नौकरी के लिए गुहार लगाती रही। हर
बार की तरह उसे यही आश्वासन मिल जाता कि हमें आपकी चिन्ता है। अभी आप जाएं। हम
आपको पत्र द्वारा सूचित कर देंगे। उसकी निराशा बढ़ती जा रही थी। कोई किसी की मदद
कब तक कर सकता है। धीरे-धीरे सभी ने अपनी मजबूरियां गिनानी शुरु कर दीं। वक्त
बेइन्तहा कठिन गुजरने लगा था। जब संसार ठुकराता है तब ईश्वर याद आता है। वह ज्यादा
वक्त ईश्वर की भक्ति में तत्लीन रहने लगी।
कुछ ही दिनों में बेटी की शादी होनी थी
लेकिन लड़के वालों ने जाने क्यों अचानक इस रिश्ते को अशुभ करार दे दिया। शादी की
सब तैयारियां चौपट हो गई थीं। लड़का अच्छा है कहीं ये रिश्ता हाथ से न निकल जाये
यही सोचकर उसकी मां ने रिश्ता पक्का किया था। लेकिन अब घर का सारा बजट गड़बड़ा गया
था। अनावश्यक एवं अधिक खर्च पर अकुंश लगाना आवश्यक हो गया था। लेकिन उसकी बेटी
अन्दर से दुखी न थी कि रिश्ता टूट गया। वह कहती जैसे हरि की इच्छा। वह अभी और
पढ़ना चाहती थी इसलिए भगवान ने उसे एक मौका दे दिया था।
जब कोई राह न सूझे तब उपर वाला ही राह
दिखाता है। उसकी बेटी पढ़ाई में काफी होशियार थी। भगवान की करनी देखिए कि उसे
अमिताभ जी के कौन बनेगा करोड़पति में जाने का मौका मिल गया। किस्मत ने उसे हॉटसीट
पर तो बैठा दिया था, अब उसके ज्ञान की असली परीक्षा होनी थी। अमिताभ जी, कठिन सवालों के सही
उत्तर पाकर मंत्रमुग्ध हो रहे थे। के.बी.सी. से करोड़ रुपये जीत कर लाई तो घर के
हालात एकदम सुधर गये। नई कार व अपना घर खरीद कर परिवार के साथ रहने लगे। उसने आगे
की पढ़ाई शुरु कर दी। हाथ की लकीरों में अच्छा नसीब न लिखा हो तो कलम उठा लो। जिस
घर में लड़की को पराया धन समझ कर पाला जाता रहा हो, वह आज उसी घर के लिए नई रोशनी बन कर उभर
रही थी। उसने भारत की सबसे बड़ी प्रशासनिक सेवा के लिए संघ लोक सेवा आयोग की
प्रारम्भिक परिक्षा की तैयारी शुरु कर दी। वह पास ही में एक कोचिंग सेन्टर में
जाकर जरुरी टिप्स भी लेती रही। वह प्रथम प्रयास में विफल हो गई। यदि इन्सान हार ना
माने तो जो चाहे वो कर सकता है।
अगली कोशिश में सफलता मिल ही गई वह अच्छे
रैंक के साथ उत्तीर्ण हुई। घर पर मीडिया के पत्रकारों का सैलाब सा आ गया था।
अनेकों मित्रों, जानकारों एवं रिश्तेदारों के बधाई सन्देश मिल रहे थे। घनिष्ट लोगों का
घर पर जमावड़ा बढ़ने लगा। आज उसकी मां की आंखों में खुशी के आंसु बरबस ही छलक रहे
थे। पहले वह अपने भाग्य को कोसती थी कि लड़की के ब्याह के लिय दहेज कहां से देंगे।
जग के पालनहारे का खेल देखिये, भाई को भी अनुकंपा
के आधार पर रिक्त पड़े पद पर नौकरी मिल गई, इस तरह घर में फिर से खुशियों के जमाने
लौट आये।
Bhai gajab
ReplyDeleteThanks . Who are you my bro?
DeleteMotivational n feeling
ReplyDeleteThanks
ReplyDeleteUmda lekhan.....badhai ho.....Achi pakad hai shabdo par.....keep it up
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