दिन और रात
28.01.2019
जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन का सफर , यूँ कहें कि रात के बाद दिन और दिन के बाद रात अनवरत चलता रहता है ना कभी थकता है ना कभी रुकता है रोज वही सूरज निकलता है जो तब निकलता था, वही चाँद तारे, कुछ बदला ही नहीं लगता, लगता है मानों कल ही की बात हो ।
लेकिन बीते समय को निहारुँ तो लगता है कि जाने कौन सी दुनिया से आये हैं उस समय और इस समय में दिन रात का अन्तर हो गया है। कहाँ गये वो दिन जब सब नया सा लगता था, दोस्तों के साथ हंसी -ठठ्ठा होता था,खुब आनन्द आता था। देखते देखते सभी साथियों के बाल सफेद हो गये, चेहरे की चमक कम हो गई, आँखों के नीचे झुरियाँ दिखाई देने लगीं और जोड़ों का दर्द भी सताने लगा। कुछ दोस्तों को उच्च रक्तचाप हो गया तो कई दोस्तों को मधुमेह ने घेरा हुआ है, सभी मोटे से हो गये, कोई पतला हो गया है शायद आनुवांशिक असर हो।
गये जमाने के सारे सुख के आगे आज के सुख फीके से लगते हैं, जाने ये सभी को लगता है या फिर मुझे ही ऐसा लगता है। आज घर में सारे सुख साधन हैं लेकिन माँ का प्यार नहीं है। रुपये पैसे हैं लेकिन सच्चा यार नहीं है। कभी लगता है कि कोई ताकत तो है जिसके आगे हम सभी कठपुतली की तरह नाचते रहते हैं। किसी शायर ने क्या खूब कहा है,
"कौन किसका हबीब होता है, कौन किसका रकीब होता है,
यूँ तो बन जाते हैं रिश्ते-नाते जिसका जैसा नसीब होता है"।
इस दुनिया में कौन दुश्मन हो जाये और कौन प्यारा , कहा नही जा सकता । जर, जोरु और जमीन, इन तीनों के लिए झगड़ा होता है, बरसों बरस के बहुत प्यारे रिश्ते भी पल भर में टूटते देखें हैं इनके कारण, अलग ही दुनियादारी की एक तसवीर सामने आती है, बात जो समझ आई वो ये कि किसी भी रिश्तेदार का आँख मूंद कर विश्वास नहीं करना चाहिये चाहे कितना ही प्यारा हो, ये दुनिया है प्यारे कुछ भी हो सकता है । ऒम शान्ति
28.01.2019
जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन का सफर , यूँ कहें कि रात के बाद दिन और दिन के बाद रात अनवरत चलता रहता है ना कभी थकता है ना कभी रुकता है रोज वही सूरज निकलता है जो तब निकलता था, वही चाँद तारे, कुछ बदला ही नहीं लगता, लगता है मानों कल ही की बात हो ।
लेकिन बीते समय को निहारुँ तो लगता है कि जाने कौन सी दुनिया से आये हैं उस समय और इस समय में दिन रात का अन्तर हो गया है। कहाँ गये वो दिन जब सब नया सा लगता था, दोस्तों के साथ हंसी -ठठ्ठा होता था,खुब आनन्द आता था। देखते देखते सभी साथियों के बाल सफेद हो गये, चेहरे की चमक कम हो गई, आँखों के नीचे झुरियाँ दिखाई देने लगीं और जोड़ों का दर्द भी सताने लगा। कुछ दोस्तों को उच्च रक्तचाप हो गया तो कई दोस्तों को मधुमेह ने घेरा हुआ है, सभी मोटे से हो गये, कोई पतला हो गया है शायद आनुवांशिक असर हो।
गये जमाने के सारे सुख के आगे आज के सुख फीके से लगते हैं, जाने ये सभी को लगता है या फिर मुझे ही ऐसा लगता है। आज घर में सारे सुख साधन हैं लेकिन माँ का प्यार नहीं है। रुपये पैसे हैं लेकिन सच्चा यार नहीं है। कभी लगता है कि कोई ताकत तो है जिसके आगे हम सभी कठपुतली की तरह नाचते रहते हैं। किसी शायर ने क्या खूब कहा है,
"कौन किसका हबीब होता है, कौन किसका रकीब होता है,
यूँ तो बन जाते हैं रिश्ते-नाते जिसका जैसा नसीब होता है"।
इस दुनिया में कौन दुश्मन हो जाये और कौन प्यारा , कहा नही जा सकता । जर, जोरु और जमीन, इन तीनों के लिए झगड़ा होता है, बरसों बरस के बहुत प्यारे रिश्ते भी पल भर में टूटते देखें हैं इनके कारण, अलग ही दुनियादारी की एक तसवीर सामने आती है, बात जो समझ आई वो ये कि किसी भी रिश्तेदार का आँख मूंद कर विश्वास नहीं करना चाहिये चाहे कितना ही प्यारा हो, ये दुनिया है प्यारे कुछ भी हो सकता है । ऒम शान्ति
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