Tuesday, January 22, 2019

मेहनत और समय



23/01/2019
मेहनत और समय 
जब  कभी समस्याओं से घिरा हूँ तब समय का एक एक पल कई साल के बराबर लगा, लेकिन जब समय अच्छा आया तो कई दिन- महीेने भी कुछ पल भर लगे। क्या ये समय कभी तेज तो कभी धीरे-धीरे चलता है, आप कहेंगे की क्या कभी समय भी अपनी गति कम ज्यादा करता है गंभीर प्रश्न... चिन्तन अवश्य कीजियेगा... 
जो समय बचपन एवं जवानी में  ठहरा सा लगता था आज दिन महीने साल जल की तेज धारा की तरह बहा जा रहा है।

           जिंदगी बहुत छोटी है, जो हमसे अच्छा व्यवहार करें उन्हे दिल की गहराई से शुक्रिया कहो ओर बाकि के बारे में कभी भी बुरा मत सोचो, ये जीवन सही से जीने की कला है।  हमारी जरुरत कितनी हैं? और हमारी अगली पीढ़ी की  जरुरत कितनी होंगी कहा नही जा सकता इसलिए जो आप से आसानी से बन पड़े उतना ही संचय करें,  आप केवल अगली पीढ़ीयों के लिए ही मर-खपने के लिए इस दुनिया में आये हो क्या? क्या कभी सोचा है कि आपके दादा -दादी या पड़दादा पड़दादी ने कितनी शान्ति से जीवन  बिताया होगा, वे यकीन करते थे कि परमात्मा या ईश्वर के फैसले हमेशा ख्वाहिशों से बेहतर होते हैं। कभी उनके बारे में सोचते हो क्या? वे कैसे जीवन यापन करते होंगे कितनी दुख तकलीफों को सहा होगा हम सोच भी नहीं सकते उनके जीवनशैली के बारे में,  उन्हे ज्ञान था  "क्यों करते हो गुरुर अपने चार दिन के ठाठ पर, मुठ्ठी भी खाली रहेंगी जब पहँचोगे घाट पर.."  इसलिए उनके द्वारा बहुत कम ही आपके लिए संचित सम्पत्ति  मिली होगी ये तो सच है, है कि नहीं? लेकिन हम अपने और बच्चों के लिए मशीन हुए जा रहें हैं,  इस दौड़ का कोई अन्त नहीं है प्यारे। 

           समय का कुछ पता नहीं है कि अगले पल क्या होगा,  कोई क्या करेगा  कौन जान सकता है भला ! उन्हे मेहनत और समय की कीमत समझ आये  ये जरुरी है, अन्यथा जीवन में अनेक मुश्किले मुह बाहें खड़ी हैं।
ऒम शान्ति


 
















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